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हिन्दु धर्म के ध्वज वाहक,हिंदु धर्म को अपना प्रथम व अंतिम कर्तव्य मानने वाले है,ब्राम्हण - " ब्राम्हणोँ का झूठा विरोध "- प्रथा बंद करो। - दिलीप पांडेय

वेब सीरीज़ के निशाने पर ब्राह्मण क्यों है ? - ब्राह्मणों की छवि को घिनौनी तरीके से पेश करके जिहादी और कम्युनिस्ट एक ही तीर से कई निशाने करते हैं - पहला... ब्राह्मणों से नफरत पैदा होने पर हिंदू धर्म से दूरी अपने आप बढ़ जाती है क्योंकि हिंदू धर्म को फ़ॉलो करवाना ही मूल रूप से ब्राह्मणों का कर्तव्य रहा है - दूसरा.... हिंदू धर्म से दूरी बढ़ते ही किसी व्यक्ति के अंदर सेकुलरिज्म की मात्रा अपने आप बढ़ जाती है और इस तरह कथित सेकुलर विचारधारा को लाभ होता है - तीसरा... सेक्युलरिज्म बढ़ते ही हिंदू धर्म का एक आदमी न्यूट्रल हो जाता है और इससे गजवा-ए-हिंद का रास्ता अपने आप साफ हो जाता है - इसीलिए पूरी योजना बनाकर जिहादी डायरेक्टर और प्रॉड्यूसर वेब सीरीज़ में ऐसे डायलॉग्स डाल रहे हैं जिससे ब्राह्मणों पर लांछन लगे और बड़ी तरकीब से ये लांछन भी ब्राह्मण किरदारों के मुंह से लगवाए जा रहे हैं - तांडव वेब सीरीज़ के पहले ही एपीसोड में डायलॉग है... देवकीनन्दन किसी दलित से कहता है कि हमने हजारों साल तुम्हारा शोषण किया है इसीलिए तुम 70 साल से मलाई काट रहे हो । - यानी कम्युनिस्टों ने हिंदू धर्म के अंदर दलितों के शोषण का जो झूठ फैलाया... अब उसे फ़िल्मों और वेब सीरीज़ के माध्यम से स्थापित करने की पूरी कोशिश की जा रही है - जबकि सच तो ये है कि ढाका के मलमल बनाने वाले लाखों दलितों के अंगूठे तो इन्हीं कम्युनिस्टों के मानस पिता अंग्रेजों ने ही कटवाए थे । और जिस ब्राह्मणवादी व्यवस्था को ये हर वक्त कोसते हैं उसी ब्राह्मणवादी व्यवस्था की देन थी.. भारत की मलमल... जिसको बेचकर पीढ़ियों तक जुलाहों ने अपना घर चलाया... और ना सिर्फ़ घर चलाया बल्कि सोने की अशर्फ़ियों से अपने घर भी भरे । -बने रहिये हमारे साथ jantarmantartimes.online पर । - इसी तरह मिर्ज़ापुर की वेब सीरीज़ में भी एक त्रिपाठी ख़ानदान को गुंडा बदमाश दिखाया है । इसके डायेक्टर क्लीन शेव जिहादी फ़रहान अख्तर ने कभी आज तक ये नहीं बताया कि उसकी कौम में ससुर कैसे बहू का हलाला करता है। लेकिन ब्राह्मणों के परिवारों में जो कभी नहीं हुआ... वो इस क्लीन शेव जिहादी ने दिखाया । -मिर्ज़ापुर वेबसीरीज में ये दिखाया गया कि त्रिपाठी ख़ानदान की बहू... ससुर का बिस्तर गर्म कर रही है । और सबसे ज्यादा दुर्भाग्य की बात ये है कि उदारवादी ब्राह्मणों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इसका समर्थन किया । - सबसे गंभीर बात ये है कि ये वेबसीरीज आज से 50 साल बाद भी रहेगी । लेकिन इस वेबसीरीज की पोल खोलने वाली झूठ उजागर करने वाली बातें तब तक खत्म हो चुकी होंगी और इस तरह 50 सालों बाद आने वाली नई पीढ़ी के मन में ये बात old is gold बनकर स्थापित हो जाएगी कि ब्राह्मण अपनी बहुओं के साथ व्याभिचार करते थे । - पुरानी फ़िल्मों के जमाने से ही ब्राह्मण जमकर निशाने पर रहा । ये दिखाया गया कि कैसे ब्राह्मण 100 रुपए लेकर कुंडली बदल देता है रिश्ता तय करवा देता है - शिखा धारी ब्राह्मण आज समाज में अपना पूरा सम्मान इसी कुत्सित प्रोपागेंडा के चलते खो चुका है । यानी ये प्रोपागेंडा सफल साबित हुआ है । - जबकि अगर आप किसी से भी ये पूछ लें कि आपने कहां देखा कि ब्राह्मण लालची होता है... कामी और विलासी होता है... तो वो आपको सटीक कोई बात नहीं बता पाएगा । आखिर में यही बोलेगा कि हमको सब पता है क्योंकि हमने फ़िल्मों में देखा है । - हर जाति में कुछ अच्छे बुरे लोग होते हैं... ब्राह्मणों में भी जरूर थोड़े होंगे लेकिन बीते 70 सालों से ब्राह्मणों के ख़िलाफ़ जिस तरह का प्रोपागेंडा चलाया गया वो एकदम बर्दाश्त के बाहर हो चुका है और भारतीय संस्कृति के लिए हानिकारक है - कुल मिलाकर ब्राह्मण इसका प्रतिकार कर पाने में असफल साबित हुआ है । भीम राव अंबेडकर को पढ़ा लिखाकर विलायत भेजनेवाला भी ब्राह्मण ही था । आजादी की लड़ाई में 60 प्रतिशत से ज्यादा नेता ब्राह्मण ही थे लेकिन ब्राह्मण अपना केस आज तक दुनिया के सामने ठीक से रख ही नहीं पाया है । पंडित दिलीप पांडे जी का इस लेख में विशेष महत्व है इसे बनाने और इसे आगे भेजने और प्राप्त करने में पंडित महानुभाव का हार्दिक धन्यवाद ।

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