मेरे जैसे साधारण परिवार के युवा को अ भा विद्यार्थी परिषद से जोड़ना और एक सक्रिय जुझारू कर्मनिष्ठ देशभक्त,छात्रों की समस्याओं को ताकत से सुलझाने के लिए लड़ने की शिक्षा देने वाले आदरणीय शालिगराम जी तोमर मेरी जीवन की संजीवनी हैं उनके लिए विद्यार्थी परिषद के अनेक कार्यकर्ताओं के अपने अपने संस्मरण रहे होंगे निश्चित रूप से उनका जीवन मेरे लिये संदीपनी ऋषि,गुरु वशिष्ठ,गुरु द्रोणाचार्य आचार्य चाणक्य से कम नही है ।-मनीष पोल सम्पादक राष्ट्रीय मासिक जंतर मंतर टाईम्स JANTARMANTARTIMES.ONLINE
यह लेख सभी कार्यकर्ताओं के अनुभव का संकलन है।
*👏👏पुण्य स्मरण👏👏* संघ के वरिष्ठ प्रचारक सरल एवं सौम्य व्यवहार के धनी *शालिगराम जी तोमर* का जन्म मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम पोलायकलां में 4 जुलाई 1941 को एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था शालिग्राम जी की प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में हुई गांव में शाखा लगने पर अपने बड़े भाई श्री राम प्रसाद तोमर के साथ वे भी शाखा में जाने लगे धीरे धीरे संघ के विचार और शाखा के कार्यक्रमों के प्रति अनुराग बढ़ता चला गया , कुछ समय बाद उन्हें ही शाखा का मुख्य शिक्षक बना दिया गया , इस काल मे शाखा मे भरपूर संख्यात्मक एवं गुणात्मक वृद्धि हुई ।अतः तहसील एव जिले के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उनकी शाखा पर आए , अब वे अपनी आगामी शिक्षा पूर्ण करने के लिए जिला केन्द्र शाजापुर आ गए , यहा पढाई के साथ ही संघ कार्य की गति भी बढने लगी *१९६५ मे हायर सैकेंड्री कर उन्होंने स्वयं को संघ कार्य के लिए समर्पित कर दिया , प्रारंभ मे वे राजगढ़ मे विस्तारक बनाए गए* , क्रमशः उन्होंने संघ के तीनों वर्ष के प्रशिक्षण तथा बी. ए. , मनोविज्ञान मे एम. ए. तथा कानून की परीक्षा भी उत्तीर्ण की ।
*1967 में उन्हें उज्जैन का नगर प्रचारक बनाया गया।*
*क्रमशः वे जिला और फिर उज्जैन के विभाग प्रचारक बने।*
आपातकाल में पुलिस उन्हें तलाश ही करती रही। इनके नाम वारंट थे; पर वे भूमिगत रहकर कार्यकर्ताओं को संगठित कर संघ पर प्रतिबन्ध और इंदिरा गांधी की तानाशाही के विरुद्ध आंदोलन को तेज करते रहे।
जो कार्यकर्ता जेल में थे, उनके परिवारों से जीवंत सम्पर्क कर उनका उत्साह बनाये रखने में शालिगराम जी की प्रमुख भूमिका रही।
*1978 में उन्हें 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' के काम में लगाया गया।*
*क्रमशः उनका कार्यक्षेत्र बढ़ता गया और उन्होंने महाकौशल, मध्यप्रदेश, उड़ीसा तथा उत्तर प्रदेश में विद्यार्थी परिषद के कार्य को मजबूत किया।*
उस दौरान बने कई कार्यकर्ताओं ने भविष्य में राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा प्राप्त की।
*शालिगराम जी ने संगठन के काम को स्थायित्व देने के लिए उज्जैन में संघ तथा फिर विद्यार्थी परिषद के कार्यालय बनवाये।*
भोपाल में भी उन्होंने शासन से भूमि आवंटित कराई और उस पर परिषद कार्यालय बनवाया।
1992 में वे ब्रेन ट्यूमर के शिकार हो गये। शल्य चिकित्सा से कुछ लाभ तो हुआ; पर उसके दुष्प्रभाव से उनके शरीर के निचले भाग पर लकवा मार गया।
*अतः वे अपने गांव पोलायकलां ही आ गये। यहां उन्होंने संघ की योजना से मानव सेवा विकास न्यास, आदर्श श्रीकृष्ण गोशाला, निवेदिता महिला मंडल आदि का गठन किया।*
*इनके द्वारा नेत्र शिविर, अनाज भंडारण आदि करते हुए वे सेवा एवं ग्राम्य विकास के क्षेत्र में सक्रिय हो गये।*
उन्होंने विद्यालय खोलने के लिए ग्राम सभा की आठ बीघा भूमि प्रदेश शासन को भी उपलब्ध कराई।
आगे चलकर तीन बार उनकी शल्यक्रिया और हुई; पर वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाये।
*26 नवम्बर, 2010 को उज्जैन के संजीवनी चिकित्सालय में उनका देहांत हुआ।*
*शालिगराम जी ने अनेको स्वयंसेवको का निर्माण ही नही किया अपितु उनके दिलो पर राज भी किया..........इसलिए हमारे लिए आप हमेशा हमेशा स्मरणीय रहेंगे* 🚩👏🚩👏🚩👏🚩👏🚩

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