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भ्रम है कि कोई संत था जिस ने किया कमाल-लेखक मनोज कुमार मंत्री ( राजनैतिक-सामाजिक विश्लेषक) हमका माफी दै दो फेम



नहीं मिलती है आजादी बिना खड़ग बिना ढाल,
भ्रम है कि कोई संत था जिस ने किया कमाल ।

आंधी से और बढ़ती है जंगल की बढी आग,
भ्रम था कि कोई संत था जिस ने किया कमाल ।

 भारत में किस ने छोड़ा अजब ढंग की बवाल,
 भारत के बेटे दर-बदर, दुश्मन का दिया साथ ।

 अपना किला दुश्मन को और माल भी दिया,
 ऐसी फकीरी जो है खलीफत के काम की ।

ज़िद में दिया है देश के बेटों का बलिदान,
भ्रम है कि कोई संत था जिस ने किया कमाल ।

 तुर्की के वास्ते किया मालाबार को स्वाहा,
 सुल्तान था क्या देश का? या हिंदू जो कट मरा।

कटवा के दोनों बांह किया देश अपाहिज,
इस काम में निकला कोई उस्ताद पुराना ।

 उल्टा पड़ा हर दांव, हुए देश के टुकड़े,
बाबर मती के संत किसने ये किया कमाल ।

 जब सत्य का आग्रह हुआ जवान मर मिटे,
मजदूर मर गए,कई किसान पिट गए,
 हिंदू व मुसलमान,सिख-पठान लड़ मरे,
 कदमों पर तेरे कोटी नर-मुंड गिर पड़े ।

लाशों को छोड़ कुर्सी पे दौड़े जवाहरलाल,
सच है ये रहा होगा किसी संत का कमाल ।

मन में दारुल-इस्लाम और तन पर लंगोटी,
मुजाहिद को लिए ढूंढते काफ़िर की वो चोंटी ।

जिस देश का न सिर किसी के सामने झुका ,
लेकिन तूने झुका दी हिमालय की भी चोटी ।

दुनिया में कोई कर नहीं सकता था ऐसा काम,
भ्रम देके जाने कैसे, कर दिया था ये कमाल।

 जग में कोई मरा तो बाबा एक ही मरा,
 हर गांव/शहर को मिली तेरे नाम की एक राह।

मांगे से ना मिलता जो बिना मांगे ले लिया,
विष ऐसा बो दिया जो सबका काल बन गया।

 हर दिन जो तेरे नाम पर मिलता रहा फिर दान,
 सरकार है आज भी तेरा करती हैं इस्तेमाल।

 भ्रम है कि कोई संत था जिस ने किया कमाल,
 भ्रम है कि कोई संत था जिस ने किया कमाल।

यह रचना आपको कैसी लगी । हमें अवश्य लिख भेजिये । हमें आपके आंकलन की प्रतीक्षा रहेगी ।अर्थ बिना सब व्यर्थ है । ऑनलाइन सहयोग करते रहिये । हर युग में महाराणा प्रताप को भामाशाह की जरुरत है । गुरु गोविन्द सिंह जी को राजा टोडरमल की आवश्यकता है ।और हमे आप जैसे सहयोग करने वाले महानुभावों की। Stay Home-Stay Secure. वंदे मातरम् भारत माता की जय ।
संपादक 
मनीष पोल 
अखंड भारत विश्वविद्यालय 
का मुख पत्र 
जंतर मंतर टाईम्स

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