मुंबई मे जब-जब मै जाता तो ऐसा प्रतीत होता है।शहर के उच्ची बिल्डिंग,मल्टीनेशनल कंपनिया,भागते लोग मेरे औकात का एहसास दिलाता है।
मुबंई मे दो तरह के लोग रहते है।एक है जो जिनका मकसद अमिर बनना।और दूसरे लोग वे जिनका मकसद जिदंगी जिना।
कौतुहल शहर के व्यस्त लोग हमेशा भागती जिदंगी के बीच दम तोङ देते है।
मुबंई मे दो तरह के लोग रहते है।एक है जो जिनका मकसद अमिर बनना।और दूसरे लोग वे जिनका मकसद जिदंगी जिना।
कौतुहल शहर के व्यस्त लोग हमेशा भागती जिदंगी के बीच दम तोङ देते है।

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