आज का रामायण पाठ : श्री राम श्री मदोस्वामी तुलसीदास विरचित श्री राम चरित मानस
श्री रामश्री मदोस्वामी तुलसीदास विरचित
श्री राम चरित मानस
श्री हरीश्री मदोस्वामी तुलसीदास विरचित
श्री राम चरित मानस
त्वमेव माता च पिता त्वमेव ,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ,
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव ,
त्वमेव सर्वं मम देवदेव।
ध्यान : जो भक्तों की अभिलाषा पूर्ण करने वाले है ;ब्रम्हा ,विष्णु ,शिव आदि निरंतर जिनकी सेवा किया करते है ;हनुमान सुग्रीव एवं भारत आदि भाई बड़े प्रेम से जिनकी आराधना में लगे रहते है ;जो अहैतुक और अनंत करुणा रूपी अमृत के सागर है ;जिनके साथ श्री सीता जी शोभायमान हो रही है;उन श्यामसुंदर द्विभुज पीताम्बरधारी,प्रसन्नमुख लाल कमल के दल के समान सुन्दर नेत्र वाले भगवान् श्री राम की मै वंदना करता हूँ।
श्री गणेशाय नमः
श्री जानकी वल्लभों विजयते
श्री राम चरित मानस
प्रथम सोपान
बाल कांड
श्लोक //१//
अक्षरों,अर्थ समूहों,रसों,छंदों,और मंगलों को करने वाली सरस्वती जी और गणेश जी की मै वंदना करता हूँ।



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